
सुबह का समय,
शीतांश की आँख खुली तो उसने खुद को बेड पर अकेला पाया! वो बेड से उतरा और रूम से निकल कर अंगीरा के रूम में बिना डोर नॉक किये घुसा चला आया जहाँ उसे क्लोसेट से अंगीरा की आवाज आई “सिफी, अच्छा हुआ तुम आ गई! ये देखो ब्रा का हुक नहीं लग रहा, लगा डॉ जरा!”

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