कारवार बीच,
कारवार बीच की लहरें शांत थीं, लेकिन उनके पीछे की गहराइयाँ ठीक वैसी ही थीं जैसी इस वक्त अंगीरा के भीतर मचल रही थीं। शीतांश ने कार धीरे से बीच के किनारे रोकी। समुन्द्र की नम खुशबू हवा में तैर रही थी और रेत पर चांदनी की चादर बिछी हुई थी।

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