
विशाली के आख़िरी शब्द जैसे निर्वाण के कानों में अटक गए थे "तिया की प्योरनेस कैसे संभालोगे?" वह कुछ पल तक वहीं खड़ा रह गया। विशाली बिना पीछे देखे चली गई लेकिन अपने पीछे ऐसे सवाल छोड़ गई जिनका जवाब निर्वाण के पास नहीं था।
उसने धीरे से दीवार का सहारा लिया और आँखें बंद कर लीं। उसे एहसास हुआ कि वह आज भी विशाली से जुड़ी यादों से पूरी तरह मुक्त नहीं हुआ है। बात प्यार की नहीं थी बल्कि उन अधूरे सवालों और गिल्ट की थी जो उनके रिश्ते के टूटने के बाद भी उसके भीतर दबे रह गए थे।






Write a comment ...