
निर्वाण तेज़ कदमों से होटल के लॉबी की तरफ़ बढ़ गया। उसके दिमाग़ में बस एक ही बात घूम रही थी "ये लड़की आखिर चाहती क्या है.?" जैसे ही वह कॉरिडोर के मोड़ तक पहुँचा, अचानक किसी ने उसका हाथ पकड़ लिया।
अगले ही पल एक ज़ोरदार खिंचाव हुआ। निर्वाण सीधे दीवार के पास जा लगा। उसने देखा वही लड़की यानि कि विशाली उसके बिल्कुल सामने खड़ी थी। उसकी उँगलियाँ अभी भी निर्वाण की शर्ट का कॉलर पकड़े हुए थीं।






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